पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में छात्रों का विरोध प्रदर्शन लगातार उग्र होता जा रहा है। हाल के दिनों में मुजफ्फराबाद विश्वविद्यालय के छात्रों ने बढ़ती फीस, घटती शैक्षणिक सुविधाओं और प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ सड़कों पर उतरकर पाकिस्तान सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। यह विरोध प्रदर्शन पहले शांतिपूर्ण तरीके से शुरू हुआ था, लेकिन बाद में हिंसक रूप ले लिया, जिससे प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए।
जानकारी के मुताबिक, मुजफ्फराबाद विश्वविद्यालय में छात्रों ने सबसे पहले कक्षाओं का बहिष्कार करते हुए कैंपस के भीतर रैली निकाली। छात्रों की मुख्य मांगें थीं फीस में बढ़ोतरी को तुरंत वापस लिया जाए, छात्रावासों और लैब की सुविधाएं सुधारी जाएं, और विश्वविद्यालय में रोजगार उन्मुख पाठ्यक्रमों की शुरुआत की जाए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार ने बार-बार वादे किए, लेकिन जमीन पर कोई बदलाव नहीं दिखा।
जैसे-जैसे आंदोलन ने रफ्तार पकड़ी, छात्र सड़कों पर उतर आए और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ नारे लगाने लगे। कई जगहों पर पुलिस से उनकी झड़प हुई। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि उन्हें शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने नहीं दी जा रही, बल्कि पुलिस बल का इस्तेमाल कर आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। इस दौरान कुछ सरकारी वाहनों और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान भी पहुंचा।
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि इस आंदोलन में अब न सिर्फ छात्र, बल्कि आम नागरिक और अभिभावक भी शामिल हो रहे हैं। उनका कहना है कि PoK में शिक्षा व्यवस्था लगातार गिरती जा रही है और पाकिस्तान सरकार यहां के युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है। इंटरनेट सेवाओं में भी रुकावट की खबरें सामने आई हैं, जिससे छात्रों का आक्रोश और बढ़ गया है।
कई छात्रों ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर कहा है कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा नहीं, बल्कि अपने अधिकारों के लिए लड़ाई है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सरकार कश्मीर के नाम पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर राजनीति करती है, लेकिन यहां के युवाओं की मूलभूत जरूरतों को नजरअंदाज करती है।
वहीं, स्थानीय प्रशासन का कहना है कि स्थिति को नियंत्रण में लाने की कोशिश की जा रही है और छात्रों से शांतिपूर्ण तरीके से बातचीत की जा रही है। लेकिन बढ़ती जनभावनाओं को देखते हुए आंदोलन के और फैलने की आशंका बनी हुई है।
यह विरोध प्रदर्शन PoK में युवाओं के बीच बढ़ती असंतोष की एक झलक है। जनरेशन Z के ये छात्र अब खुलकर पाकिस्तान सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं, जो इस बात का संकेत है कि वहां के युवा अब अपने अधिकारों और पहचान के लिए आवाज बुलंद करने को तैयार हैं।












