दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। सोमवार सुबह राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में घनी धुंध की परत छाई रही, जिससे दृश्यता काफी कम हो गई। सड़कों पर वाहनों की रफ्तार धीमी पड़ गई और लोगों को सांस लेने में तकलीफ की शिकायतें बढ़ गईं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 460 के आसपास दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है।
सोमवार सुबह आनंद विहार, रोहिणी, द्वारका, आईटीओ, और लाजपत नगर जैसे इलाकों में प्रदूषण का स्तर चरम पर रहा। कई जगहों पर पीएम 2.5 और पीएम 10 के स्तर ने निर्धारित सीमा से पांच से छह गुना तक अधिक दर्ज किए गए। विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर भारत में तापमान में गिरावट और हवा की गति कम होने के कारण प्रदूषक तत्व जमीन के पास जमा हो गए हैं, जिससे धुंध और स्मॉग की स्थिति और गंभीर हो गई है।
प्रदूषण के इस भयावह हालात पर राजनीति भी गर्मा गई है। आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की भाजपा सरकार पर डेटा में हेरफेर का आरोप लगाया है। आप प्रवक्ता ने कहा कि सरकार वास्तविक आंकड़े छिपा रही है और प्रदूषण नियंत्रण के नाम पर जनता को गुमराह कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मॉनिटरिंग स्टेशनों के डेटा को जानबूझकर कम दिखाया जा रहा है ताकि वायु गुणवत्ता की स्थिति को ‘सुधरा हुआ’ बताया जा सके। आप नेताओं ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार के अधीन एजेंसियां वास्तविक प्रदूषण स्तर जारी करने से बच रही हैं।
वहीं भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी अपनी नाकामी छिपाने के लिए झूठे आरोप लगा रही है। भाजपा नेताओं का कहना है कि दिल्ली में प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह स्थानीय कारक हैं , जैसे धूल, निर्माण कार्य और वाहन उत्सर्जन जिन पर नियंत्रण की जिम्मेदारी दिल्ली सरकार की है। केंद्र ने राज्यों के साथ मिलकर ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान लागू किया है, जिसके तहत स्कूलों में छुट्टी, निर्माण कार्य पर रोक, और डीजल वाहनों के प्रतिबंध जैसे उपाय किए जा रहे हैं।
इधर, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस स्तर का प्रदूषण बच्चों, बुजुर्गों और सांस के रोगियों के लिए बेहद खतरनाक है। डॉक्टरों ने लोगों को बाहर निकलते समय मास्क पहनने, सुबह की सैर से बचने और घरों में एयर प्यूरीफायर के उपयोग की सलाह दी है।
प्रदूषण पर काबू पाने के लिए प्रशासन ने कई कदम उठाए हैं, जिनमें जल छिड़काव, सड़क सफाई और वाहनों की जांच शामिल है, लेकिन स्थिति में अभी तक कोई ठोस सुधार नहीं दिखा। दिल्ली-एनसीआर के लोगों को फिलहाल इस जहरीली हवा से जल्द राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।












