केंद्रीय गृह राज्य मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता बंदी संजय कुमार ने रविवार को कांग्रेस और एआईएमआईएम पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि दोनों पार्टियां मिलकर तेलंगाना को इस्लामिक राज्य में बदलने की कोशिश कर रही हैं। हैदराबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बंदी संजय ने कहा कि कांग्रेस और एआईएमआईएम के बीच का गठजोड़ सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि विचारधारात्मक है, जिसका उद्देश्य राज्य की सामाजिक संरचना को बदलना है।
बंदी संजय ने कहा कि एआईएमआईएम ओल्ड हैदराबाद में लगातार धार्मिक कट्टरता और अलगाववादी सोच को बढ़ावा दे रही है, और कांग्रेस पार्टी इस पर चुप्पी साधे हुए है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह सत्ता पाने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है और इसी वजह से एआईएमआईएम जैसी पार्टी के साथ अप्रत्यक्ष रूप से समझौता कर रही है।
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि तेलंगाना में भाजपा ऐसी किसी भी साजिश को सफल नहीं होने देगी। उन्होंने कहा, भाजपा इस देश की एकता, अखंडता और हिंदू समाज की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। कांग्रेस और एआईएमआईएम चाहे जितनी कोशिश कर लें, तेलंगाना को इस्लामिक राज्य बनने नहीं दिया जाएगा।
बंदी संजय ने अपने बयान में ओल्ड हैदराबाद में पश्चिम बंगाल की हिंदू लड़कियों के कथित शोषण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि यहां बाहरी राज्यों से आई कई युवा महिलाएं मानव तस्करी और उत्पीड़न का शिकार हो रही हैं, लेकिन पुलिस प्रशासन इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा। उनका आरोप था कि पुलिस एआईएमआईएम नेताओं के दबाव में कार्रवाई से बच रही है।
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। उन्होंने कहा, यह सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि मानवता और महिलाओं की गरिमा से जुड़ा मामला है। अगर पुलिस मूकदर्शक बनी रही, तो भाजपा सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेगी।
बंदी संजय ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि राहुल गांधी की पार्टी हमेशा से तुष्टिकरण की राजनीति करती रही है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस और एआईएमआईएम के बीच अंदरूनी समझौता है, जिसका मकसद मुस्लिम वोट बैंक को मजबूत करना और भाजपा को रोकना है।
भाजपा नेता के इस बयान ने तेलंगाना की राजनीति में नई हलचल मचा दी है। कांग्रेस और एआईएमआईएम दोनों पार्टियों ने फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है ।












