लोकतंत्र की ताकत उस समय सबसे अधिक झलकती है, जब नागरिक कठिन परिस्थितियों के बावजूद मतदान का अपना अधिकार निभाते हैं। बिहार के रोहतास जिले के नोखा में ऐसा ही एक प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला। यहां 85 वर्षीय रामविलास यादव ने, जो शारीरिक रूप से अक्षम हैं, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बावजूद मतदान किया। उन्होंने अपने परिवार की मदद से खटिया पर लेटकर मतदान केंद्र तक पहुँचकर वोट डाला। यह दृश्य न केवल भावनात्मक था, बल्कि लोकतंत्र के प्रति गहरी आस्था का प्रतीक भी बना।
रामविलास यादव पिछले कुछ वर्षों से चलने-फिरने में असमर्थ हैं। उम्र और बीमारी के कारण वह बिस्तर पर ही रहते हैं। लेकिन जब मतदान का दिन आया, तो उन्होंने अपने परिवार से कहा कि चाहे कुछ भी हो जाए, वे वोट जरूर डालेंगे। उनके इस जज्बे को देखकर परिवार के सदस्य भी भावुक हो उठे। उन्होंने तय किया कि वे किसी भी कीमत पर उन्हें मतदान केंद्र तक पहुंचाएंगे।
परिवार के सहयोग से रामविलास यादव को सावधानीपूर्वक खटिया पर लिटाया गया और कुछ लोगों की मदद से उन्हें मतदान केंद्र तक ले जाया गया। मतदान कर्मियों ने भी उनकी स्थिति देखकर विशेष व्यवस्था की, ताकि वे आसानी से मतदान कर सकें। जैसे ही उन्होंने अपना वोट डाला, वहां मौजूद लोगों ने तालियों से उनका स्वागत किया। कई मतदाता इस भावुक दृश्य को देखकर अभिभूत हो गए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रामविलास यादव का यह कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा है। जहां कई युवा मतदान के दिन घर पर रहना पसंद करते हैं या छोटी-छोटी असुविधाओं के कारण वोट नहीं डालते, वहीं एक बुजुर्ग व्यक्ति ने अपनी शारीरिक सीमाओं के बावजूद लोकतंत्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई।
मतदान केंद्र पर मौजूद अधिकारियों ने भी उनकी सराहना की। एक अधिकारी ने कहा, रामविलास यादव जी ने जो किया, वह हमारे लोकतंत्र की असली ताकत को दिखाता है। ऐसे नागरिक ही देश की लोकतांत्रिक परंपरा को जीवित रखते हैं।
परिवार के सदस्यों ने बताया कि यादव जी हमेशा से मतदान को अपना कर्तव्य मानते आए हैं। पिछले चुनावों में भी वे किसी न किसी तरह मतदान करने जरूर जाते थे। उनका कहना है कि “वोट देना सिर्फ अधिकार नहीं, बल्कि देश के भविष्य को तय करने की जिम्मेदारी है।
रामविलास यादव की यह कहानी पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गई है। सोशल मीडिया पर भी उनकी तस्वीरें और वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिसमें वे खटिया पर लेटे हुए मतदान करते दिखाई दे रहे हैं। लोग उन्हें लोकतंत्र का सच्चा प्रहरी कहकर सम्मान दे रहे हैं।
इस घटना ने यह साबित कर दिया कि अगर मन में लोकतंत्र के प्रति सच्ची भावना हो, तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती। रामविलास यादव ने अपने साहस, संकल्प और देशभक्ति से एक ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया है, जो हर नागरिक को यह याद दिलाता है कि लोकतंत्र में हर वोट की अहमियत होती है। उनका यह कदम आने वाले समय में समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।












