भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा है कि भारतीय सेना यूक्रेन युद्ध को एक प्रयोगशाला के रूप में देख रही है, जिससे आधुनिक युद्ध की नई रणनीतियों और तकनीकी चुनौतियों को समझने में मदद मिल रही है। उन्होंने कहा कि युद्ध का स्वरूप अब तेजी से बदल रहा है और इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस , साइबर तकनीक, ड्रोन और सैटेलाइट आधारित हथियारों की भूमिका अत्यधिक बढ़ गई है।
जनरल द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि भारतीय सेना इस युद्ध से कई रणनीतिक सबक सीख रही है, ताकि देश की सीमाओं की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाया जा सके। उन्होंने कहा, हम यूक्रेन युद्ध को केवल एक संघर्ष के रूप में नहीं, बल्कि एक प्रयोगशाला की तरह देख रहे हैं। इस युद्ध में इस्तेमाल की गई तकनीक, हथियार प्रणाली और साइबर रणनीतियों से भविष्य के युद्धों की दिशा का संकेत मिलता है।
सेना प्रमुख ने बताया कि आधुनिक युग में युद्ध केवल मैदान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह डिजिटल और साइबर स्पेस तक फैल गया है। अब किसी भी संघर्ष में डेटा, सूचना नियंत्रण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका निर्णायक हो गई है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना इन बदलावों को ध्यान में रखते हुए अपने प्रशिक्षण, रणनीति और उपकरणों में निरंतर सुधार कर रही है।
उन्होंने बताया कि यूक्रेन संघर्ष ने दिखाया है कि छोटे ड्रोन, स्वार्म ड्रोन और स्मार्ट हथियार युद्ध की दिशा बदल सकते हैं। भारत भी इन क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि भारतीय सैनिक भविष्य के युद्धक्षेत्र में किसी भी तकनीकी चुनौती का सामना करने में सक्षम हों, उन्होंने जोड़ा।
जनरल द्विवेदी ने कहा कि भारतीय सेना न केवल पारंपरिक युद्धक तैयारियों पर ध्यान दे रही है, बल्कि साइबर सुरक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर भी विशेष ध्यान केंद्रित कर रही है। इसके लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन और निजी क्षेत्र के साथ मिलकर कई परियोजनाएं चलाई जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि आज के युग में “मिलिटरी टेक्नोलॉजी डिटरेंस” यानी तकनीकी श्रेष्ठता ही किसी देश की रक्षा क्षमता का सबसे बड़ा आधार बन गई है। भारत इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है ताकि किसी भी परिस्थिति में देश की सीमाएं सुरक्षित रहें।
अंत में, जनरल द्विवेदी ने कहा कि भारतीय सेना हर संभावित परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीति तैयार कर रही है। यूक्रेन युद्ध ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य के संघर्ष तकनीक, सूचना और मनोवैज्ञानिक आयामों पर आधारित होंगे , और भारतीय सेना इन सभी क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।












