दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए भीषण विस्फोट के बाद पूरे देश में दहशत और आक्रोश का माहौल है। इस घटना में कई लोगों की मौत और दर्जनों घायल हुए हैं। मामले की जांच दिल्ली पुलिस और राष्ट्रीय जांच एजेंसी कर रही है। इस बीच, जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कुछ कड़ी टिप्पणियां की हैं।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि इस तरह की घटनाओं के बाद कुछ लोग बिना किसी ठोस सबूत के जम्मू-कश्मीर और वहां के लोगों को दोषी ठहराने लगते हैं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। उन्होंने कहा, हर कश्मीरी आतंकवादी नहीं होता। कुछ लोगों की हरकतों के कारण पूरी आबादी को शक की नजर से देखना अन्यायपूर्ण है। हमें याद रखना चाहिए कि कश्मीर के लोग भी आतंकवाद के खिलाफ हैं और उन्होंने इसके खिलाफ सबसे ज्यादा नुकसान झेला है।
उन्होंने दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार से आग्रह किया कि मामले की जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जाए ताकि असली दोषी कानून के शिकंजे में आएं और निर्दोषों को परेशान न किया जाए। अब्दुल्ला ने यह भी सवाल उठाया कि जब इस तरह के संदिग्ध लोगों को पहले ही सरकारी नौकरियों से बर्खास्त किया गया था, तो उन पर मुकदमा क्यों नहीं चलाया गया। उनके अनुसार, अगर उनके खिलाफ ठोस सबूत थे तो कार्रवाई आधी क्यों छोड़ी गई? या तो मुकदमा चलाया जाना चाहिए था या फिर उन्हें निर्दोष साबित कर सेवा में बहाल किया जाना चाहिए था।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि इस तरह की घटनाएं देश की एकता और सामाजिक सद्भाव के लिए चुनौती हैं, इसलिए नेताओं और मीडिया को भी जिम्मेदारी से बयान देने चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि अफवाहों पर विश्वास न करें और जांच एजेंसियों को अपना काम करने दें।
इस बीच, दिल्ली पुलिस ने कहा है कि विस्फोट की जांच कई एंगल से की जा रही है, जिसमें आतंकी संगठन की संलिप्तता, तकनीकी उपकरणों का इस्तेमाल और फॉरेंसिक सबूतों का विश्लेषण शामिल है। जांच एजेंसियों ने जम्मू-कश्मीर कनेक्शन की भी जांच शुरू की है, हालांकि अभी तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा गया है।
उमर अब्दुल्ला का यह बयान ऐसे समय आया है जब सोशल मीडिया पर कुछ समूहों द्वारा कश्मीरियों को लेकर नकारात्मक टिप्पणी की जा रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे वक्त में देश को एकजुट रहने की जरूरत है, न कि किसी समुदाय को निशाना बनाने की।
उन्होंने अंत में कहा, आतंकवाद किसी धर्म, क्षेत्र या जाति से जुड़ा नहीं होता। दोषियों को सजा जरूर मिले, लेकिन निर्दोषों को बदनाम करना बंद किया जाए।












