कर्नाटक में राजनीतिक हलचल एक बार फिर तेज हो गई है। राज्य के डिप्टी सीएम और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार अपने ताज़ा बयानों को लेकर सुर्खियों में बने हुए हैं। कैबिनेट फेरबदल की अटकलों, विधायकों की बढ़ती महत्वाकांक्षा और खुद उनके राजनीतिक भविष्य पर उठ रहे सवालों के बीच शिवकुमार ने जिस तरह से जवाब दिए, उसने सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
हाल ही में मीडिया से बातचीत के दौरान शिवकुमार से सवाल पूछा गया कि पार्टी के कई विधायक मंत्री बनने की इच्छा जता रहे हैं, इस पर उनकी क्या प्रतिक्रिया है। इस पर उन्होंने साफ कहा कि महत्वाकांक्षी होना कोई गलत बात नहीं है। हर किसी के भीतर आगे बढ़ने का सपना होना चाहिए। राजनीति में भी यही स्वाभाविक है। उनके इस बयान को मंत्री पद की चाह रखने वाले विधायकों के लिए एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
कर्नाटक में कई महीनों से कैबिनेट फेरबदल की चर्चा चल रही है। सरकार में कुछ पद खाली हैं और कई विधायक लंबे समय से मंत्रिमंडल में जगह की उम्मीद लगाए बैठें हैं। ऐसे में शिवकुमार का यह बयान उनके उत्साह को बढ़ाने के साथ-साथ राजनीतिक संदेश भी देता है कि नेतृत्व इन इच्छाओं से अनजान नहीं है।
इसके साथ ही जब उनसे यह पूछा गया कि क्या वे भविष्य में मुख्यमंत्री पद संभाल सकते हैं, तो शिवकुमार ने मुस्कुराते हुए एक दिलचस्प टिप्पणी की। उन्होंने कहा, क्यों ना इस बारे में ज्योतिषी से पूछ लें? उनके इस बयान ने सियासी चर्चाओं को नया मोड़ दे दिया। विपक्ष से लेकर राजनीतिक विश्लेषकों तक, इस वक्तव्य को कई तरीके से व्याख्यायित किया जा रहा है। कुछ इसे हल्का-फुल्का मज़ाक कह रहे हैं, तो कुछ इसे उनके भीतर छिपी आकांक्षाओं का संकेत मान रहे हैं।
कांग्रेस सरकार बनने के बाद से ही डीके शिवकुमार और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को लेकर कई तरह की राजनीतिक अटकलें लगती रही हैं। हालांकि दोनों नेता बार-बार यह स्पष्ट कर चुके हैं कि वे मिलकर सरकार को मजबूत करने में जुटे हैं और उनके बीच कोई खींचतान नहीं है। इसके बावजूद राजनीतिक हलकों में सत्ता संतुलन को लेकर चर्चाएं समय-समय पर उभरती रहती हैं।
शिवकुमार के ज्योतिष वाले बयान को भी इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है। पार्टी के भीतर और बाहर, दोनों जगह इस टिप्पणी ने उत्सुकता बढ़ा दी है। कुछ राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि शिवकुमार ने इस बयान के ज़रिए यह संकेत दिया है कि वे भविष्य की संभावनाओं को लेकर पूरी तरह खुले हैं और खुद को सिर्फ डिप्टी सीएम की भूमिका तक सीमित नहीं देख रहे।
दूसरी तरफ, शिवकुमार के समर्थक इस टिप्पणी को सहज बताते हुए कहते हैं कि उनका उद्देश्य केवल सवाल को हल्के-फुल्के अंदाज़ में टालना था। वहीं, आलोचक इसे उनकी बढ़ती महत्वाकांक्षा से जोड़ते हैं।
कुल मिलाकर, डीके शिवकुमार के ये बयान कर्नाटक की राजनीति में नई हलचल पैदा कर चुके हैं। कैबिनेट फेरबदल की स्थिति स्पष्ट नहीं है, लेकिन विधायकों की उम्मीदें और राजनीतिक गणित दोनों तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में कर्नाटक की सियासत में और भी दिलचस्प मोड़ देखने को मिल सकते हैं।












