नक्सलवाद से निपटने के लिए सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे सतत और संगठित प्रयासों को शुक्रवार को बड़ी सफलता मिली है। सुरक्षा बलों ने एक बड़े अभियान के तहत देश के सबसे कुख्यात और वांछित नक्सलियों में शामिल माड़वी हिड़मा को मुठभेड़ में ढेर कर दिया है। हिड़मा के साथ पाँच अन्य नक्सलियों का भी सफाया कर दिया गया। यह सफलता न केवल सुरक्षा एजेंसियों के मनोबल को बढ़ाने वाली है, बल्कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति बहाली की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा बलों को हाल ही में हिड़मा के ठिकाने और गतिविधियों को लेकर पुख़्ता सूचना मिली थी। इसके बाद एक संयुक्त टीम ने घने जंगलों में विशेष अभियान चलाया। ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों ने सुरक्षा बलों पर अचानक हमला किया, जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई। करीब दो घंटे चली इस मुठभेड़ में हिड़मा सहित छह नक्सलियों को मार गिराया गया। घटनास्थल से भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद, विस्फोटक सामग्री और कई दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं, जिनका उपयोग नक्सल गतिविधियों में किया जाता था।
माड़वी हिड़मा नक्सलियों के टैक्टिकल विंग ‘प्लाटून नंबर 1’ का कमांडर था और उस पर कई राज्यों में दर्जनों हमलों की साजिश रचने के आरोप थे। वह कई बड़े नक्सली हमलों का मास्टरमाइंड माना जाता था, जिनमें दर्जनों जवानों ने अपनी जान गंवाई थी। उसकी तलाश में वर्षों से सुरक्षा एजेंसियों ने विशेष टीमें तैनात कर रखी थीं। हिड़मा के मारे जाने को सुरक्षा विशेषज्ञ नक्सल आंदोलन के लिए भारी झटका मान रहे हैं।
अधिकारी बताते हैं कि यह अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण था क्योंकि हिड़मा इलाके की भौगोलिक स्थितियों और जंगलों के हर मार्ग को भली-भांति जानता था। वह हर बार सुरक्षा बलों को चकमा देकर भागने में सफल रहता था। लेकिन इस बार सुरक्षा एजेंसियों ने सटीक इनपुट और रणनीति के दम पर उसे घेरने में सफलता पाई।
केंद्र और राज्य सरकारों ने इस सफलता की सराहना करते हुए सुरक्षा बलों को बधाई दी है। अधिकारियों का कहना है कि नक्सलवाद को समाप्त करने के लिए अब और अधिक तेज़ी से अभियान चलाया जाएगा। नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास कार्यों और आधारभूत संरचनाओं को मजबूत करने की दिशा में भी कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों में भी हिड़मा के मारे जाने से राहत की भावना दिखाई दे रही है। कई वर्षों से नक्सली गतिविधियों के कारण विकास कार्य बाधित हो रहे थे और लोगों में भय का वातावरण था। सुरक्षा बलों की इस कार्रवाई से उम्मीद है कि क्षेत्र में शांति और सामान्य जीवन की बहाली का मार्ग और अधिक सुगम होगा।
इस सफलता ने स्पष्ट कर दिया है कि नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में है और सुरक्षा एजेंसियाँ इसे जड़ से समाप्त करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।












