दिल्ली-एनसीआर में गुरुवार सुबह प्रदूषण स्तर ने एक बार फिर खतरनाक स्तर को पार कर लिया। राजधानी दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद सहित पूरे क्षेत्र में घना जहरीला स्मॉग छाया रहा। कई इलाकों में दृश्यता बेहद कम हो गई, जबकि गाजियाबाद और नोएडा में एयर क्वालिटी इंडेक्स 400 के पार पहुंच गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। इससे लोगों को सांस लेने में परेशानी, आंखों में जलन और गले में खराश की शिकायतें तेज़ हो गईं।
सुबह के समय दफ्तर जाने वाले लोगों, स्कूल बसों और सड़क पर निकलने वाले यात्रियों को घने स्मॉग के कारण काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। कई स्थानों पर सड़कें पूरी तरह से धुंध और धुएं के मिश्रण से ढकी रहीं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगले 24-48 घंटे स्थिति और बिगड़ सकती है, क्योंकि हवा की गति बेहद धीमी है और प्रदूषक सतह के करीब ही जमा हो रहे हैं।
दिल्ली के आनंद विहार, मुंडका, सीमा पुरी, रोहिणी, पटपड़गंज और इंद्रलोक जैसे इलाकों में AQI 420 से 460 के बीच दर्ज किया गया। एक्यूआई 300 से ऊपर ही ‘बहुत खराब’ माना जाता है, जबकि 400 को पार करते ही हवा ‘गंभीर’ श्रेणी में आ जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्तर की हवा स्वस्थ लोगों के फेफड़ों पर भी गंभीर असर डाल सकती है, जबकि बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और श्वसन रोगों से पीड़ित लोगों के लिए यह बेहद खतरनाक है ।
नोएडा सेक्टर-62, 18, 137 और ग्रेटर नोएडा में सुबह 7 बजे AQI 410 से 450 के बीच दर्ज किया गया। वहीं गाजियाबाद के इंदिरापुरम, वसुंधरा, वैशाली और साबी इलाक़ों में एक्यूआई 420 तक पहुंच गया। लोगों ने बताया कि सुबह घरों की खिड़कियाँ खोलते ही अंदर धुएं जैसी बदबू महसूस हो रही थी। जॉगिंग या मॉर्निंग वॉक पर जाने वाले लोग भी वापस लौट आए।
हालांकि अभी तक दिल्ली सरकार की ओर से स्कूलों के लिए कोई नई एडवाइजरी जारी नहीं की गई है, लेकिन प्रदूषण स्तर को देखते हुए माता-पिता अपने बच्चों को भेजने को लेकर चिंतित हैं। पिछले वर्षों की तरह, यदि स्थिति और बिगड़ती है तो स्कूलों में छुट्टियां या ऑनलाइन क्लासें शुरू करने पर भी विचार किया जा सकता है।
पर्यावरण विशेषज्ञों ने स्मॉग बढ़ने की वजहों में पराली जलाना, गाड़ियों से निकलने वाले धुएं, औद्योगिक प्रदूषण, निर्माण कार्य, और मौसम में ठंड बढ़ने के साथ हवा की गति कम होना बताया है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर हर साल की तरह इसी मौसम में प्रदूषण की मार झेल रहा है। तापमान गिरने और हवा की गति धीमी होने पर प्रदूषक जमीन के पास जमा होने लगते हैं, जिससे स्मॉग बनता है ।
दिल्ली के कई अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। डॉक्टरों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में सांस की समस्या, अस्थमा अटैक, एलर्जी और आंखों में शिकायतों वाले मरीजों की संख्या 25-30 प्रतिशत तक बढ़ गई है। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि बेहद ज़रूरी न हो तो लोग बाहर जाने से बचें।
दिल्ली सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान पहले से लागू कर रखा है। इसके तहत निर्माण कार्यों पर रोक, पानी का छिड़काव, डीजल गाड़ियों की जांच और सड़क सफाई जैसे कदम जारी हैं। हालांकि लोग सवाल उठा रहे हैं कि हर साल स्थिति बिगड़ने के बावजूद स्थायी समाधान क्यों नहीं निकल पा रहा।
विशेषज्ञों ने लोगों को N95 या उससे बेहतर गुणवत्ता वाले मास्क पहनने की सलाह दी है। सुबह-सुबह व्यायाम या दौड़ने से बचने, घर में एयर प्यूरीफायर चलाने, और बच्चों तथा बुजुर्गों को घर के भीतर रखने की भी अपील की गई है।












