सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन द्वारा आयोजित विशेष विदाई समारोह में न्यायमूर्ति बी.आर. गवई ने अपने लंबे और समृद्ध न्यायिक करियर को याद करते हुए भावुक अंदाज़ में देश की न्यायपालिका, सहकर्मी न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं और न्याय के प्रति समर्पित सभी लोगों के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया। 23 नवंबर को सेवानिवृत्त होने जा रहे जस्टिस गवई के लिए यह समारोह उनके सुप्रीम कोर्ट में अंतिम कार्य दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित किया गया, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय के अनेक वरिष्ठ न्यायाधीश और अधिवक्ता मौजूद रहे।
अपने संबोधन में जस्टिस गवई ने कहा कि भारत की न्यायपालिका ने उन्हें न केवल सम्मान दिया, बल्कि निरंतर सीखने, विचारों का विस्तार करने और समाज के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण विकसित करने का अवसर भी प्रदान किया। उन्होंने कहा कि न्यायालय केवल कानून की व्याख्या का स्थान नहीं बल्कि समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा का महत्वपूर्ण मंच भी है। जस्टिस गवई ने कहा, न्यायपालिका ने मुझे बहुत कुछ दिया है सम्मान, जिम्मेदारी और जनता की सेवा का अमूल्य अवसर। मैं इस संस्थान का सदैव ऋणी रहूंगा।
जस्टिस गवई, जिन्होंने उच्चतम न्यायालय में अपने कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण संवैधानिक और सामाजिक मुद्दों से जुड़े मामलों की सुनवाई में निर्णायक भूमिका निभाई, उन्हें न्यायिक विवेक, सरलता और संतुलित फैसलों के लिए जाना जाता है। उनके फैसलों में सामाजिक न्याय, समानता और लोकतांत्रिक मूल्यों की झलक अक्सर देखी गई। विदाई समारोह में वक्ताओं ने उनके योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि जस्टिस गवई ने हमेशा संविधान की सर्वोच्चता और न्यायिक प्रणाली की गरिमा को प्राथमिकता दी।
SCAORA के पदाधिकारियों ने भी जस्टिस गवई के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में अधिवक्ताओं को हमेशा उचित अवसर और गरिमा प्रदान की। एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड समुदाय ने याद किया कि जस्टिस गवई कोर्ट में बहस के दौरान अधिवक्ताओं को पूर्ण अवसर देते थे और उनकी बात को गंभीरता से सुनते थे, जिससे न्यायिक प्रक्रिया और भी सहभागितापूर्ण बनती थी।
समारोह के दौरान उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने यह भी कहा कि जस्टिस गवई ने अपने फैसलों से न्यायिक सोच को व्यापक किया और न्यायपालिका को आम जनता के और करीब लाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने कहा कि जस्टिस गवई की सरल व विनम्र कार्यशैली आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।
अपने आखिरी संबोधन में जस्टिस गवई ने यह भी कहा कि न्यायाधीश के रूप में उनकी यात्रा चुनौतियों से भरी रही, लेकिन हर चुनौती ने उन्हें अधिक संवेदनशील और अधिक दृढ़ बनाया। उन्होंने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सेवानिवृत्ति उनके लिए एक नए अध्याय की शुरुआत है, लेकिन न्यायपालिका के प्रति उनका सम्मान और जुड़ाव जीवन भर बना रहेगा।
जस्टिस गवई की विदाई के साथ सुप्रीम कोर्ट एक अनुभवी, संतुलित और संवेदनशील न्यायाधीश को अलविदा कह रहा है, जिनके योगदान को लंबे समय तक याद किया जाएगा।












