यह G20 शिखर सम्मेलन अफ्रीका महाद्वीप पर आयोजित होने वाला पहला है, जिसे पीएम मोदी ने बहुत विशेष बताया है। उन्होंने कहा है कि भारत अपनी बहुत-दृष्टि प्रस्तुत करेगा, जो वसुधैव कुटुम्बकम तथा One Earth, One Family, One Future के सिद्धांतों पर आधारित है।
मोदी जी तीनों सत्रों में बोलने की उम्मीद कर रहे हैं। पहले सत्र का विषय है समावेशी और सतत आर्थिक विकास किसी को पीछे न छोड़ना , जिसमें अर्थव्यवस्था की सुदृढ़ता, व्यापार का रोल, विकास के लिए वित्तपोषण और ऋण बोझ जैसे अहम मुद्दे सामने आएँगे।
दूसरे सत्र का नाम है एक सक्षम और लचीली दुनिया G20 का योगदान, जहां प्रमुख फोकस आपदा जोखिम में कमी, जलवायु परिवर्तन, न्यायसंगत ऊर्जा परिवर्तन और खाद्य प्रणालियों को मज़बूत करने पर होगा।
तीसरे सत्र में मोदी सभी के लिए न्यायपूर्ण भविष्य का मुद्दा उठाएँगे, जिसमें महत्वपूर्ण खनिज संसाधन, सम्मानजनक रोजगार, और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जिम्मेदार उपयोग जैसे विषय शामिल हैं। भारत इस मंच पर अपने दृष्टिकोण को स्पष्ट रूप से व्यक्त करेगा।
शिखर सम्मेलन के सिलसिले में, पीएम मोदी कई द्विपक्षीय बैठकों भी करेंगे। खासकर, वे भारत-ब्राज़ील-दक्षिण अफ्रीका नेताओं की बैठक में हिस्सा लेंगे, जो G20 के बाहर भी एक महत्वपूर्ण दक्षिण-दक्षिण सहयोग मंच है।
विदेश मंत्रालय के जारी बयान के अनुसार, भारत G20 के एजेंडे पर एक मजबूत और समावेशी आवाज देगा, खासकर उन मुद्दों पर जो वैश्विक दक्षिण के लिए महत्वपूर्ण हैं।
इस यात्रा की पृष्ठभूमि भी महत्वपूर्ण है: यह लगातार चौथा G20 सम्मेलन है जो ग्लोबल साउथ में हो रहा है, और भारत की भागीदारी इस बात की ओर संकेत देती है कि विकासशील देशों की आवाज़ वैश्विक मंचों पर बढ़ रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा है कि इसके अलावा वे भारतीय डायस्पोरा , भारतीय मूल के लोगों से भी मिलने की उम्मीद कर रहे हैं, क्योंकि दक्षिण अफ्रीका में भारतीय समुदाय काफी बड़ा है।
इस प्रकार, मोदी का यह दौरा न सिर्फ G20 के माध्यम से वैश्विक मुद्दों पर भारत की प्राथमिकताओं को दोहराने का अवसर है, बल्कि IBSA के ज़रिए दक्षिण-दक्षिण सहयोग को और गहराई देने का एक मंच भी है। यह भारत के लिए अपने दृष्टिकोण विशेषकर न्याय, समावेशिता और सततता को विश्व स्तर पर प्रस्तुत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।












