मुर्शिदाबाद में राजनीतिक माहौल उस समय अचानक तनावपूर्ण हो गया जब तृणमूल कांग्रेस के विधायक हुमायूं कबीर ने बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण का समर्थन करते हुए स्थानीय स्तर पर ऐसी पहल करने की बात कही। उनकी इस टिप्पणी के बाद बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई। इसके जवाब में भाजपा नेता शाखारव सरकार ने उसी क्षेत्र में राम मंदिर बनाने का प्रस्ताव रख दिया। दोनों नेताओं के बयानों ने राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है, जिसके चलते आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
हुमायूं कबीर ने हाल ही में एक जनसभा में कहा कि यदि लोग चाहें तो मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद जैसा ढांचा बनाया जा सकता है। उनकी इस घोषणा को भाजपा ने तुरंत राजनीतिक मुद्दा बनाकर तृणमूल कांग्रेस पर “धार्मिक ध्रुवीकरण” की राजनीति करने का आरोप लगाया। भाजपा नेताओं ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस प्रदेश में वोट बैंक की राजनीति के लिए धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ कर रही है, जो कि सामाजिक एकता के लिए खतरनाक है।
भाजपा नेता शाखारव सरकार ने कबीर के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए घोषणा की कि यदि तृणमूल विधायक मस्जिद बनाने की बात कर सकते हैं तो वे भी स्थानीय लोगों के सहयोग से राम मंदिर निर्माण की पहल करेंगे। उनका कहना है कि तृणमूल कांग्रेस जानबूझकर धार्मिक मुद्दों को भड़का रही है ताकि चुनावी लाभ हासिल किया जा सके। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा देकर जनता के बीच विभाजन पैदा कर रही है।
दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि भाजपा हर मुद्दे को सांप्रदायिक रंग देकर राजनीति करना चाहती है। तृणमूल का दावा है कि उनके विधायक की टिप्पणी को गलत संदर्भ में पेश किया गया और भाजपा इसे चुनावी हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश कर रही है। पार्टी का कहना है कि बंगाल की पहचान सद्भाव और बहुलतावाद है, जिसे भाजपा लगातार कमजोर करने की कोशिश कर रही है।
दोनों दलों की तीखी बयानबाजी का असर स्थानीय स्तर पर भी दिखाई दे रहा है। मुर्शिदाबाद में सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है। कुछ लोगों का मानना है कि राजनीतिक दल धार्मिक संरचनाओं को लेकर बयानबाजी करके माहौल खराब कर रहे हैं, जबकि आम जनता वास्तविक मुद्दों—जैसे रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य—पर चर्चा चाहती है।
प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है। स्थानीय अधिकारी शांति बनाए रखने के लिए समुदाय के वरिष्ठ लोगों के साथ संवाद कर रहे हैं। पुलिस ने भी संवेदनशील स्थानों पर चौकसी बढ़ा दी है ताकि किसी भी प्रकार का तनाव न फैल सके।
इस पूरे विवाद ने बंगाल की राजनीति में एक बार फिर सांप्रदायिकता बनाम विकास की बहस को हवा दे दी है। दोनों दल जहां एक-दूसरे पर सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मुद्दे चुनावी मौसम में अधिक उभरते हैं और आम लोगों को इससे सावधान रहना चाहिए। राजनीतिज्ञों के बयानों ने भले ही माहौल गरमाया हो, लेकिन जनता उम्मीद कर रही है कि राज्य की राजनीति विकास और वास्तविक समस्याओं पर फोकस करे।












