मध्य प्रदेश के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा द्वारा सोशल मीडिया पर ब्राह्मण समाज की बेटियों के बारे में की गई कथित अभद्र टिप्पणी के बाद प्रदेशभर में भारी रोष फैल गया है। उनकी टिप्पणी को न सिर्फ अनुचित और असंवेदनशील बताया जा रहा है, बल्कि विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने इसे समाज के एक वर्ग की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला कदम बताया है। इसी मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार ने त्वरित कार्रवाई की है और अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, टिप्पणी सामने आते ही ब्राह्मण संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और कई राजनीतिक प्रतिनिधियों ने कड़ी आपत्ति जताई। विभिन्न जिलों से ज्ञापन सौंपकर संतोष वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई। संगठन नेताओं का कहना है कि एक जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी से इस तरह की भाषा की उम्मीद नहीं की जा सकती, और यह न केवल समाज को आहत करता है बल्कि प्रशासनिक मर्यादाओं का भी उल्लंघन है।
मामला तूल पकड़ते ही मुख्यमंत्री ने भी इसे गंभीरता से लिया और तत्काल संबंधित विभाग को कार्रवाई करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से कहा गया कि किसी भी अधिकारी को सामाजिक संवेदनाओं और सरकारी आचार संहिता का पालन करना आवश्यक है। सार्वजनिक मंच पर इस प्रकार की टिप्पणी अनुशासनहीनता मानी जाएगी। सीएम के निर्देश के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने जांच प्रक्रिया शुरू की और औपचारिक रूप से संतोष वर्मा को नोटिस जारी किया।
नोटिस में कहा गया है कि अधिकारी बताएं कि उन्होंने ऐसी टिप्पणी क्यों की, यह किस परिस्थितियों में लिखी गई और कैसे यह सेवा नियमों का उल्लंघन नहीं है। विभाग ने साफ किया है कि यदि सात दिनों के भीतर संतोष वर्मा उचित जवाब नहीं देते या उनका स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया जाता, तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। जानकारी के अनुसार, यह मामला उच्च स्तर तक पहुंच चुका है और सरकार किसी भी प्रकार की सामाजिक असहमति या जातीय तनाव को जन्म देने वाली टिप्पणी को गंभीरता से ले रही है।
प्रदेश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन भी हुए, जिनमें प्रदर्शनकारियों ने संतोष वर्मा को तत्काल निलंबित करने और कानूनी कार्रवाई की मांग की। कुछ स्थानों पर संगठनों ने ज्ञापन सौंपकर कहा कि एक आईएएस अधिकारी द्वारा ऐसी टिप्पणी समाज में गलत संदेश देती है और इससे सरकारी तंत्र की साख पर भी असर पड़ता है। सोशल मीडिया पर भी मामला खूब चर्चाओं में है, जहां लोग प्रशासनिक जिम्मेदारियों और अधिकारियों के आचरण पर सवाल उठा रहे हैं।
उधर, विभागीय सूत्रों का कहना है कि नोटिस मिलने के बाद संतोष वर्मा से अपेक्षा है कि वे विस्तृत जवाब देंगे और अपनी टिप्पणी पर सफाई पेश करेंगे। फिलहाल सरकार इस घटना को कानून और नियमों के अनुसार देखने की बात कह रही है।
कुल मिलाकर, एक टिप्पणी ने मध्यप्रदेश में बड़ा राजनीतिक और सामाजिक विवाद खड़ा कर दिया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संतोष वर्मा का जवाब क्या होगा और आगे सरकार इस मामले में क्या कार्रवाई करती है।












