नई दिल्ली, पुलिस क्राइम ब्रांच (एनआर-1) ने ऑपरेशन साइ-हॉक के
तहत बड़ी सफलता हासिल करते हुए शेयर बाजार में निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी
करने वाले एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों सब्बीर
अहमद, मोहम्मद सरफराज और मोहम्मद दिलशाद को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से ठगी में
इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन, बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज और महत्वपूर्ण डिजिटल सबूत बरामद
किए गए हैं।
42.5 लाख की ठगी से शुरू हुई जांच (बॉक्स)
डीसीपी पंकज कुमार ने रविवार को बताया कि इस संबंध में 17 दिसंबर 2025 को क्राइम ब्रांच थाने में
ई-एफआईआर दर्ज की गई थी। यह शिकायत उत्तम नगर निवासी 56 वर्षीय रंजन ने दर्ज कराई थी,
जिसमें उन्होंने शेयर बाजार में निवेश का झांसा देकर करीब 42.5 लाख रुपये की ठगी किए जाने का
आरोप लगाया था।
36 खातों में ट्रांसफर की गई रकम (बॉक्स)
जांच के दौरान सामने आया कि ठगी की रकम 36 अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर की गई थी। इनमें
से 3 सितंबर 2025 को शिकायतकर्ता के कोटक महिंद्रा बैंक खाते से 3,74,065 रुपये यूको बैंक की
आर.के. पुरम शाखा स्थित एक खाते में भेजे गए, जिन्हें उसी दिन चेक के माध्यम से निकाल लिया
गया।
सब्बीर से खुला पूरा नेटवर्क (बॉक्स)
यह बैंक खाता मुनीरका गांव निवासी सब्बीर अहमद के नाम पर पाया गया, जिसे 21 जनवरी 2026 को
गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उसने खुलासा किया कि उसने 9 से 10 बैंक खाते खुलवाकर उनके
किट मोहम्मद सरफराज और मोहम्मद दिलशाद को सौंप दिए थे। बदले में उसे दो प्रतिशत कमीशन
मिलता था। सब्बीर की निशानदेही पर 5 फरवरी 2026 को दोनों को गिरफ्तार किया गया।
चीनी हैंडलर्स और क्रिप्टो लिंक (बॉक्स)
डीसीपी के अनुसार, पूछताछ में सरफराज और दिलशाद ने स्वीकार किया कि वे चीनी हैंडलर्स के संपर्क
में थे और यूएसडीटी क्रिप्टोकरेंसी के जरिए अंतरराष्ट्रीय लेन-देन करते थे। सबूत मिटाने के लिए उन्होंने
चेकबुक और सिम नष्ट कर दी थी, हालांकि पुलिस ने इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन बरामद कर लिए
हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, तीनों आरोपित सितंबर 2025 में साइबर पश्चिम थाना क्षेत्र में दर्ज एक
अन्य साइबर ठगी के मामले में भी गिरफ्तार हो चुके हैं।












