नागदा, 10 फरवरी टेलीविजन कार्यक्रम कौन बनेगा करोड़पति में कथित रूप से
असत्य एवं भ्रामक जानकारी प्रसारित करने के आरोप में फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन के विरुद्ध
उज्जैन जिले के प्रथम श्रेणी न्यायालय, नागदा में परिवाद प्रस्तुत किया गया है। न्यायालय द्वारा
अमिताभ बच्चन के नाम से जारी नोटिस मुंबई स्थित उनके निवास जलसा, जूहू के पते से बैरंग लौट
आया है। मामले में अगली सुनवाई 12 फरवरी को निर्धारित की गई है।
यह परिवाद वरिष्ठ अभिभाषक एल.एन. लोहरवाड एवं नोटरी आर.के. ठाकुर द्वारा संयुक्त रूप से प्रस्तुत
किया गया है। प्रकरण की पैरवी वरिष्ठ अभिभाषक एस.के. साहू कर रहे हैं। न्यायालय सूत्रों के अनुसार
मामला वर्तमान में यूएनसीआर के रूप में पंजीबद्ध है।
परिवाद का आधार परिवाद के अनुसार सोनी लिव चैनल पर 23 दिसंबर 2025 को प्रसारित केबीसी
सीजन-17 के एपिसोड क्रमांक 97 में कार्यक्रम के अंतर्गत ‘रोचक जानकारी’ खंड के दौरान अमिताभ
बच्चन द्वारा मध्य प्रदेश के नागदा को “एक छोटा सा गांव” बताया गया। साथ ही आदित्य बिड़ला ग्रुप
की ग्रेसिम इकाई द्वारा जल संकट के समाधान से जुड़ी जानकारी प्रसारित की गई।
कार्यक्रम में यह दर्शाया गया कि ग्रेसिम द्वारा बांध, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, रिजर्व वाटर सिस्टम एवं
आरओ संयंत्र स्थापित किए गए, जिससे जलस्तर बढ़ा और हजारों परिवारों को लाभ हुआ। इसके
अतिरिक्त ग्रेसिम जनसेवा अस्पताल की सेवाओं का उल्लेख भी किया गया।
परिवादकर्ताओं का कहना है कि नागदा कोई गांव नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण औद्योगिक शहर और
प्रमुख रेलवे जंक्शन है, जो मुंबई–दिल्ली मुख्य रेलमार्ग पर स्थित है। शहर की आबादी लगभग डेढ़ लाख
है तथा मध्य प्रदेश शासन द्वारा नागदा को जिला बनाए जाने की घोषणा भी की जा चुकी है। यह भी
आरोप लगाया गया है कि नागदा चंबल नदी के तट पर स्थित है, जहां वर्षों से नियमित पेयजल आपूर्ति
होती रही है। ग्रेसिम द्वारा निर्मित बांध जनसामान्य के लिए नहीं, बल्कि उद्योग संचालन के उद्देश्य से
बनाए गए हैं। इस प्रकार कार्यक्रम में प्रस्तुत जानकारी से आम जनता को भ्रमित किया गया और क्षेत्र
की छवि प्रभावित हुई।अभिभाषक का पक्ष प्रकरण की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अभिभाषक एस.के. साहू ने बताया कि अमिताभ
बच्चन द्वारा राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में तथ्यों के विपरीत जानकारी प्रस्तुत की गई है। इससे नागदा
शहर की वास्तविक पहचान को ठेस पहुंची है।
उन्होंने कहा कि मामला केबल टेलीविजन नेटवर्क अधिनियम एवं भारतीय दंड संहिता की धारा 420
(भारतीय न्याय संहिता की समतुल्य धारा 318) के अंतर्गत विचारणीय है। न्यायालय द्वारा जारी नोटिस
की तामील नहीं हो सकी है और आगे की कार्रवाई न्यायालय के निर्देशानुसार की जाएगी












