डिप्रेशन यानी अवसाद एक ऐसी समस्या है, जिसने कई लोगों को अपना शिकार बनाया हुआ है।
सिर्फ बड़े ही नहीं बल्कि बच्चे भी डिप्रेशन की समस्या से ग्रस्त हैं। आधुनिक समय में अवसाद के
कारण बच्चों और किशोरों में आत्महत्या के मामले बढ़ रहे हैं, जिसे देखते हुए दीपिका पादुकोण को
डिप्रेशन से निकालने वाली एना चांडी ने बच्चों में बढ़ रही इस समस्या पर खुलकर बात की।
दीपिका को भी डिप्रेशन से निकाल चुकी हैं एना चांडी
बैंगलुरु में रहने वाली एना चांडी लोगों को डिप्रेशन से निकालने में मदद करती हैं। बॉलीवुड एक्ट्रेस
दीपिका पादुकोण को भी डिप्रेशन से बाहर निकालने में भी उन्होंने ही मदद की थी। सिर्फ दीपिका ही
नहीं बल्कि कई सेलेब्स उनके पास अपने इलाज के लिए आते हैं। 30 साल से वे इसी तरह से लोगों
की सेवा कर रही हैं।
13-15 की उम्र के बच्चे डिप्रेशन का शिकार
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की 2017 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 13-15 वर्ष की आयु
के 4 बच्चों में से लगभग एक बच्चा डिप्रेशन से ग्रस्त है। दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में 86 मिलियन
लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं। एना चंडी का कहना है कि अवसाद, चिंता, और कई अन्य मानसिक
प्रॉब्लम्स के लक्षण लोगों को पता नहीं चल पाते, जिसके चलते बच्चों व किशोरों को सही व जरूरी
उपचार भी नहीं मिल पाता।
सही उपचार ही है अवसाद का इलाज
एना चांडी का कहना है कि बच्चों में डिप्रेशन, तनाव और कई अन्य मानसिक समस्याओं को मैनेज
किया जा सकता है लेकिन उसके लिए सही उपचार पता होना चाहिए। वह कहती हैं कि बच्चों को
अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए क्योंकि इससे माता-पिता
बच्चों को आसानी से इस समस्या से बचा सकते हैं। 2015 में दीपिका ने मानसिक स्वास्थ्य के
खिलाफ जागरूकता फैलाने के लिए 'द लाइव लव लाफ फाउंडेश भी शुरू किया था।
बच्चों में डिप्रेशन के कारण?
एना चांडी का कहना है कि बच्चों में डिप्रेशन या मेंटल डिजीज आनुवांशिक, किसी घटना या बचपन
का आघात के कारण हो सकता है। अगर किसी बच्चे के माता-पिता इस समस्या से गुजर चुके हो तो
वह इसका शिकार जल्दी हो जाते हैं। इसके अलावा अगर बच्चे किसी फैमिली प्रॉब्लम, गलत व्यवहार,
सिगरेट व शराब का सेवन कर रहे हो तो उनमें भी डिप्रेशन के चांसेस बढ़ जाते हैं।












