नई दिल्ली, 19 फरवरी फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने गुरुवार को वैश्विक कृत्रिम
बुद्धिमत्ता दौड़ में डिजिटल सार्वजनिक मूलभूत ढांचों पर आधारित पहचान-पत्र, जनधन खातों , स्वास्थ्य
कार्ड और यूपीआई जैसी सुलभ डिजिटल भुगतान सुविधाओं का संदर्भ देते हुए प्रौद्योगिकी काे जन-जन
के लिए सुलभ बनाने के क्षेत्र में भारत की तारीफ की तथा एआई जैसी प्रौद्योगिकी के लिए वैश्विक
नियम-कायदे बनाने पर जोर दिया। श्री मैक्राें ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में गुरूवार को यहां
भारत एआई इम्पैक्ट समिट एवं प्रदर्शनी -2026 में हिस्सा लेते हुए कहा कि एआई को नवाचार और
रफ्तार के साथ साथ जिम्मेदार बनाने के लिए फ्रांस , यूरोप और भारत को मिल कर चलना चाहिए ।
उन्होंने पिछले साल पेरिस में आयोजित एआई सम्मेलन में एआई को विश्व समाज को मजबूत करने का
माध्यम बनाने के लिए भारत और फ्रांस की साझा पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि एक साल में ही
इसका असर दिखा है। उन्होंने फ्रांस में 15 साल तक के बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने की अपनी
सरकार की पहल को -‘सभ्यता से जुड़ा विषय’ बताया। उन्होंने एआई को नागरिकों पर केंद्रित बनाने के
लिए सरकारों और कंपनियों के बीच मजबूत भागीदारी पर बल दिया। मुंबई से हो कर दिल्ली पहुंच
फ्रांसिसी राष्ट्रपति ने अपने भाषण की शुरुआत मुंबई के रेहड़ी-पटरीवाले की कहानी से शुरू की जो दस
साल पहले बैंक खाता नहीं खोल पा रहा था क्योंकि उसके पास कोई पहचान या औपचारिक पता नहीं
था। आज उसका खाता है और वह बैंक खाते के जरिए देश भार के अपने ग्राहकों से निश्चिंत रूप से
डिजिटल भुगतान प्राप्त करता है। इसके माध्यम से उन्होंने भारत में 1.4 अरब लोगों की डिजिटल
पहचान प्रणाली खड़ी करने और उससे नागरिकों को स्वास्थ्य सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में उत्पन्न सुविधाओं के
विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे लोगों का दैनिक जीवन बदल गया है।
उन्होंने भारत को एक “सभ्यतागत शक्ति’ बताते हुए कहा कि भविष्य उन देशों का होगा जो ” नवाचार
को ज़िम्मेदारी के साथ, प्रौद्योगिकी को इंसानियत के साथ” जोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने 1.4
अरब लोगों को डिजिटल अर्थव्यवस्था में जोड़कर कर वह कर दिखाया है जिसे दुनिया कभी नामुमकिन
कहती थी। उन्होंने कहा कि भारत अब भुगतान की एक ऐसी बुनियादी सुविधा का संचालन करता है जो
“हर महीने 20 अरब लेन-देन” का काम संभाती है और देश में “50 करोड़ डिजिटल हेल्थ कार्ड ” जारी
किये जा चुके हैं। उन्होंने आगे कहा, ” इसे इंडिया स्टैक- ओपन इंटरऑपरेबल सॉवरेन (सार्वजनिक
अवसंरचनात्क प्रणाली) कहते हैं और इंडिया एआई इम्पैक्ट सम्मेलन इसी बारे में है। फ्रांसिसी राष्ट्रपति
ने कहा कि एआई को इंसानी तरक्की के लिए एक बदलाव लाने वाली ताकत के तौर पर लिया जाना
चाहिए। उन्होंने पिछले साल पेरिस में भारत और फ्रांस के सहयोग से आयोजित एआई एक्शन समिट का
जिक्र करते हुए उस सम्मेलन को प्रौद्योगिकी के लिये वैश्विक नियम तय करने में एक अहम मोड़
बताया। उन्होंने कहा कि पेरिस एआई सम्मेलन में ” हमने उन टेक्नोलॉजी के लिए एक वैश्विक
मार्गदर्शक सिद्धांत तय किया था जो हमारे समाज और हमारी अर्थव्यवस्था को बदल देंगें। हम कहते हैं
कि एआई मानवता को तेज़ी से नवाचार करने, स्वास्थ्य सुरक्षा, ऊर्जा, परिवहन सेवाओं, खेती और
सरकारी सेवाओं में मानव जाति की भलाई के लिए बदलाव लाने में मदद करेगा। हम दोनों इस क्रांति में
विश्वास करते हैं।”
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि एआई आज बड़ी रणनीतिक स्पर्धा का क्षेत्र गया है और “बड़ी प्रौद्योगिकी
कंपनियां और भी बड़ी हो गई हैं।” उन्होंने साथ में चेतावनी दी कि इस प्रौद्योगिकी के चलते शक्ति के
खतरनाक केंद्रीयकरण का खतरा भी बढ़ रहा है। श्री मैक्रों ने कहा कि भारत का “स्मॉल लैंग्वेज मॉडल्स”,
‘कार्य विशेष पर केंद्रित , स्मार्टफोन-रेडी एआई टूल्स पर जानबूझकर दांव लगाना और स्टार्टअप्स को कम
कीमत पर 38,000 जीपीयू (ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स) की सुविधाएं देना एक अलग संप्रभु रणनीति का
उदाहरण है। भारत ने इस सोच को चुनौती दी कि एआई तो एक “एक ऐसा खेल है जिसे सिर्फ बड़े लोग
ही खेल सकते हैं।”
उन्होंने कहा कि एआई, जीपीयू, चिप्स अब भू-राजनीतिक और आर्थिक शब्दावली का हिस्सा बन गये हैं
और पेरिस एआई सम्मेलन के बाद से बड़ी टेक्नोलॉजी फर्मों के बीच शक्ति का केंद्रीयकरण और भी तेज
हो गया है।
श्री मैक्रों ने भारत, फ्रांस और यूरोप से “मानव -केंद्रित एआई” पर आधारित एक साझा रास्ता बनाने की
अपील की, जिसमें लोगों के अधिकारों की रक्षा हो, जो सबके लिए समान तरीके से सुलभ हो और रफ्तार
के लिए जिम्मेदारी को बलि पर न चढ़ाया जाए।उन्होंने कहा, ” एआई का भविष्य वे लोग बनाएंगे जो
नवाचार और ज़िम्मेदारी के साथ चलेंगे। भारत और फ्रांस मिलकर इस भविष्य को बनाने में मदद
करेंगे।” फ्रांसिसी राष्ट्रपति ने कहा “भारत और फ्रांस, यूरोप और हमारे उन भागीदारों के साथ, जो हमारे
तरीके में विश्वास करते हैं… उनका तरीका अलग हो सकता है।” उल्लेखनीय है कि पेरिस एआई एक्शन
समिट में अमेरिकी उप राष्ट्रपति ने एआई कंपनियों पर किसी तरह के औपचारिक नियमन नियंत्रण के
सुझाव पर असहमति जताते हुए कहा कि था कि इससे इस नवाचार प्रभावित होगा। श्री मैक्राें ने कहा,
“एआई का भविष्य वे लोग बनाएंगे जो इनोवेशन और ज़िम्मेदारी, टेक्नोलॉजी को मानवता के साथ
जोड़ेंगे और भारत तथा फ्रांस इस भविष्य को बनाने में मदद करेंगे।” उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन का
मकसद एआई के विकास की रफ़्तार को सिर्फ तेज़ करना नहीं था, बल्कि इस क्षेत्र में वैश्विक चर्चाओं को
ठोस आकार देना है और अब इस कहानी को बेहतर दिशा देनी है। उन्होंने एआई के क्षेत्र में फ्रांस-भारत
भागीदारी के विस्तार पर ज़ोर देते हुए कहा कि दोनों देशों की यह भागीदारी कूटनीति से आगे बढ़कर
ठोस सहयोग में बदल गई है। उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में स्वास्थ्य
क्षेत्र में एआई के लिए नया भारत– फ्रांस केंद्र इस भागीदारी का एक प्रतीक है। इसे सोरबोन यूनिवर्सिटी
और पेरिस ब्रेन इंस्टीट्यूट के साथ मिल कर स्थापित किया गया है। यह एआई-संचालित स्वास्थ्य सेवा
की संभावनाओं पर केंद्रित दुनिया के दो बड़े चिकित्सा और अनुसंधान संस्थानों को जोड़ता है।












