नई दिल्ली, 22 फरवरी राजौरी गार्डन स्थित सरस्वती बाल मंदिर सीनियर सेकेंडरी स्कूल
परिसर में श्री हनुमान संस्कृत महाविद्यालय का 48वां वार्षिकोत्सव अत्यंत गरिमामय और उत्साहपूर्ण
वातावरण में आयोजित किया गया। रंग-बिरंगी सजावट, पारंपरिक वेशभूषा और वैदिक मंत्रोच्चार से
सुसज्जित कार्यक्रम भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपराओं का जीवंत उदाहरण बना, जिसमें “अनेकता
में एकता” की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता उद्योगपति कमल कुमार गुप्ता ने की, जबकि विश्व हिंदू परिषद के
अंतरराष्ट्रीय संगठन महामंत्री मिलिन्द परांडे मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि
रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथ केवल धार्मिक नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाले
आदर्श ग्रंथ हैं और विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा के साथ सांस्कृतिक मूल्यों को भी अपनाना
चाहिए। मुख्य अतिथि के रूप में संजय सिंघल, स्वागताध्यक्ष कौशल कोठारी और सानिध्य मांगी
लाल पारीक उपस्थित रहे। महाविद्यालय के प्रधान रवीन्द्र गुप्ता और प्राचार्य डॉ. जय प्रकाश शर्मा
की उपस्थिति ने आयोजन की शोभा बढ़ाई। सभी अतिथियों का तिलक, पुष्पमाला और स्मृति-चिह्न
देकर सम्मान किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और मंगलाचरण से हुआ। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में संस्कृत नाटक,
योग की सामूहिक प्रस्तुति, भावपूर्ण गीत, सामूहिक गान और हनुमान जी के भजन ने दर्शकों को
मंत्रमुग्ध कर दिया। “महिषासुरनी” गीत की जोशीली प्रस्तुति और भोलेनाथ पर आधारित नृत्य-
नाटिका ने पूरे परिसर को भक्तिमय बना दिया। इस अवसर पर विद्यालय की वार्षिक पत्रिका
“प्रबोधिनी” का लोकार्पण भी किया गया, जिसमें विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा का सुंदर संकलन
प्रस्तुत किया गया। अंत में प्राचार्य डॉ. जय प्रकाश शर्मा ने सभी अतिथियों, अभिभावकों और
विद्यार्थियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, नेतृत्व
क्षमता और सांस्कृतिक चेतना का विकास करते हैं। यह वार्षिकोत्सव शिक्षा और संस्कृति के समन्वय
का प्रेरक पर्व सिद्ध हुआ।












