Shyama Prasad Mukherjee: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती आज, पीएम मोदी-CM योगी ने दी श्रद्धांजलि
आज हम Shyama Prasad Mukherjee की 125वीं जयंती मना रहे हैं। यह दिन उनके जीवन और देश के लिए किए गए उनके योगदान को याद करने का अवसर है। जब भारतीय इतिहास की बात आती है, तो डॉ. मुखर्जी का नाम स्वाभाविक रूप से जहन में आता है। स्वतंत्रता संग्राम से लेकर भारतीय राजनीति में उनके कदम, पूरे राष्ट्र के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसी नेताओं ने उनके प्रति सम्मान दिखाया। यह जयंती हमें उनके विचारों को फिर से समझने और आने वाली पीढ़ी के लिए उनसे सीख लेने का मौका देती है।
Shyama Prasad Mukherjee का जीवन परिचय और सामाजिक योगदान
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
Shyama Prasad Mukherjee का जन्म 6 يوليو 1901 को वर्तमान पश्चिम बंगाल के ब्रिगंज में हुआ था। उनका परिवार वैदिक परंपरा वाले परिवार से था, जहां से उनकी देशभक्ति भावना जागी। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की और अपने अध्ययन के दौरान न केवल पढ़ाई में अच्छा भी थे, बल्कि समाज सुधार के कार्यों में भी जुड़ गए। उनका प्रारंभिक जीवन पढ़ाई, मेहनत, और देशभक्ति के साथ भरा था।
स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका
वे स्वतंत्रता संग्राम के तेज आवाज थे। भारत की आजादी के लिए उन्होंने पूरे प्रचार किया। 1939 में, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से अलग होकर “जनसंघ” नामक राजनीतिक दल की स्थापना की। वह हिन्दू जाग्रति आंदोलन में भी भागीदार रहे। उनका उद्देश्य भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय पहचान का संरक्षण था। खासतौर पर, कश्मीर के मुद्दे पर उनका दृष्टिकोण मजबूत था। उनका कहना था कि भारत का एकीकरण ही उसकी असली ताकत है।
राष्ट्रीय एकता का प्रयास
Shyama Prasad Mukherjee का मुख्य लक्ष्य था भारतीय एकता बनाए रखना। वह विभाजनों का विरोध करते थे। उनका मानना था कि भारत विविधताओं का देश है, जहां सभी समूह मिल कर ही मजबूत हैं। उन्होंने भारतीय संस्कृति और परंपराओं को बढ़ावा दिया। कश्मीर में, उनका दृढ विश्वास था कि यह क्षेत्र भारत का अभिन्न हिस्सा है। उनके प्रयासों ने आज भी देश में राष्ट्रीय एकता का संदेश फैलाया है।

Shyama Prasad Mukherjee का राजनीतिक दर्शन और उनके विचारधारा
भारतीय एकता और राष्ट्रवाद
Shyama Prasad Mukherjee का मुख्य आदर्श था देश की एकता। उन्होंने कहा कि राष्ट्रभक्ति सबसे पहले है। उनके मुताबिक, हर भारतीय को अपने देश से प्यार करना चाहिए। उन्होंने विभाजन के विरोध में आवाज उठाई और कहा कि भारत का विभाजन उसके लिए भारी पड़ सकता है। उनके विचार राष्ट्रवाद को मजबूत करने की दिशा में प्रेरित करते हैं।
समावेशी लोकतंत्र और विकास की सोच
वह मानते थे कि लोकतंत्र का मतलब समाज में सबके लिए समान अवसर होना चाहिए। उनके सामाजिक सुधारों में शिक्षा पर जोर था, ताकि सभी वर्गों को बराबर अवसर मिले। उन्होंने समाज में बदलाव लाने के लिए कई प्रयास किए। उनका कहना था कि सामाजिक और आर्थिक प्रगति के बिना देश का समुचित विकास नहीं हो सकता।
धर्म और राष्ट्रीयता
Shyama Prasad Mukherjee विचार में धर्म और देश की पहचान गहरे जुड़े हुए थे। उन्होंने माना कि धर्म सिर्फ व्यक्तिगत विश्वास नहीं है, बल्कि इसने हमारी राष्ट्रीय पहचान को भी मजबूती दी है। संविधान में उनके योगदान ने भारत की सेकुलर सोच को मजबूत किया। धर्म को लेकर उनके विचार स्पष्ट थे — देश की एकता सबसे ऊपर है।
आज के लिए शिक्षाएं और प्रेरणा
युवा पीढ़ी के लिए आदर्श
आज के युवाओं को डॉ. मुखर्जी से बहुत कुछ सीखने को मिल सकता है। उनके साहस, राष्ट्रभक्ति और समाज के लिए किए गए त्याग प्रेरणा का काम हैं। यदि हम अपने देश के लिए अपने स्वार्थ त्याग कर आगे बढ़ें, तो वही उनकी सबसे बड़ी सीख है। नेतृत्व के गुण, सेवा की भावना, और देशभक्ति—उनके मूल मंत्र हैं।
सरकार और संगठनों की भूमिका
वर्तमान सरकार को चाहिए कि वह उनके आदर्शों को याद रखे। स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्र की एकता के शहीदों को सम्मान देना जरूरी है। सरकार कई योजनाओं के माध्यम से उनके विचारों को आगे बढ़ा रही है। स्कूलों में उनके जीवन और कार्यों को पढ़ाने के प्रावधान होना चाहिए। इससे युवा पीढ़ी उनके जीवन से प्रेरणा ले सके।
श्रद्धांजलि और कार्यक्रम
प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन
प्रधानमंत्री मोदी ने इस दिन अपने भाषण में कहा कि डॉ. मुखर्जी ने देशभक्ति का सच्चा उदाहरण पेश किया। उनके भाषण में विशेष वाक्यांश थे—”देश की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।” उन्होंने वीडियो के माध्यम से उनके जीवन की यादें साझा की। अपने संदेश में मोदी ने कहा कि उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं और हमें अपने देश के लिए कार्य करना चाहिए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की श्रद्धांजलि
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विविध कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. मुखर्जी का जीवन हमारे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत है। प्रदेशभर में स्कूल और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को उनके जीवन से जोड़ना था।
अन्य श्रद्धांजलि कार्यक्रम
देश के विभिन्न राज्यों में उनकी स्मृति में समारोह हुए। कई संस्थानों में उनके योगदान को याद किया गया। सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि अभियान चला जैसे कि #ShyamaPrasadMukherjee और #75YearsOfIndia जैसे। यह अभियान भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी के सम्मान में है और उसकी विचारधारा को आगे बढ़ाता है।
Shyama Prasad Mukherjee का जीवन राष्ट्रभक्ति, साहस और संविधान के प्रति जागरूकता का सर्वोत्तम उदाहरण है। उनके विचार आज भी हमारे लिए मार्गदर्शन हैं। उनका जीवन हमें सिखाता है कि देश के प्रति प्यार और समर्पण ही असली शक्ति है। हमें चाहिए कि हम उनके आदर्शों को याद रखें और अपने देश के प्रति कर्तव्य का पालन करें। आने वाली पीढ़ी के लिए उनका योगदान अमूल्य है, और उनकी शिक्षाएं सदाकर चलनी चाहिए।
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