PM Modi और विदेश मंत्रालय ने अवसर पर यह कहा है कि भारत गाजा में नागरिकों के बड़े पैमाने पर हो रही मौतों , घायल होने और मानवीय संकट के प्रति गहरी चिंता रखता है, सरकार ने राहत सामग्री भेजी है और संयुक्त राष्ट्र राहत एजेंसीयों को योगदान दिया है , भारत की विदेश नीति में पुराने समय से एक स्थाई और न्याय पूर्ण समाधान चाहता है , इसमें प्राय है यह कहा जाता है कि फिलिस्तीन और इसराइल दोनों के लिए स्वतंत्र सम प्रभु राज्यों जो एक दूसरे के साथ शांति से रहे , Modi सरकार ने इस विचार को पुनः पुष्ट किया है ।
गाजा संघर्ष के बीच भारत ने कई यू एन प्रस्तावों पर अबस्टेन की स्थिति अपनाई है , खासकर जब प्रस्तावों में एक तरफा आलोचना या संदेह हो कि कहीं आतंकवाद को बढ़ावा ना मिल जाए भारत ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रतिक्रिया में आतंकवाद , होमहोस्टेज और नागरिक क्षति की जिम्मेदारी की बात कही जानी चाहिए.
कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी पार्टी सरकार को मौन एवं हालात पर पर्याप्त स्पष्ट और प्रतिबिंबित प्रतिक्रिया ना देने के लिए आलोचना कर रही है, उन्हें लगता है कि भारत की पुरानी विदेश नीति जहां मानवाधिकार अन्याय के मुद्दे प्रमुख थे अब कही सुस्त और कम निर्णायक हो गई है ।
भाजपा सरकार इस मुद्दे पर इस तरह की स्थिति रखती है जिसे भारत की इजराइल के साथ बढ़ती हुई रक्षा प्रौद्योगिकी और आर्थिक साझेदारीया प्रभावित ना हो लेकिन साथ ही मुस्लिम देशों और फिलिस्तीन समर्थकों के दृष्टिकोण को पूरी तरह से अनदेखा भी न किया जाए , इस संतुलन के चलते भारत उचित न्याय पूर्ण और मानवीय दृष्टिकोण की पैरवी करता है , बिना खुली तौर पर किसी पक्ष को पूरी तरह से जिम्मेदार ठहराएं ।
निष्कर्ष:
भाजपा सरकार का रुख गाजा फिलिस्तीन पर मनोभावित न होकर तर्कसंगत और संतुलित रहने का है वह मानवीय संकट की चिंताओं को स्वीकार करती है इस बात पर जोर देती है संवाद अंतरराष्ट्रीय कानून और दो राज्यों में समाधान ही दीर्घ कालीन शांति ला सकते है ।
भारत के नीति साफ-सुथरी है की भारत को किस हद तक हस्तक्षेप करना है । और जिसमें विदेश नीति , राष्ट्रहित और अंतराष्ट्रीय दबावों का संतुलन शामिल है ।












