अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय AMU में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पोस्टर हटाए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्र संगठनों के बीच यह मामला गरमा गया है। दरअसल, हाल ही में विश्वविद्यालय परिसर में राष्ट्रीय एकता सप्ताह के तहत आयोजित एक कार्यक्रम में कई स्वतंत्रता सेनानियों और देश के प्रमुख नेताओं के पोस्टर लगाए गए थे। इन्हीं में योगी आदित्यनाथ का भी एक पोस्टर शामिल था, जिसे बाद में हटा दिया गया।
पोस्टर हटाए जाने के बाद भाजपा से जुड़े छात्र संगठन और कुछ स्थानीय नेताओं ने इस कदम को राजनीतिक पूर्वाग्रह बताया। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ न केवल उत्तर प्रदेश के लोकप्रिय नेता हैं, बल्कि एक संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति हैं। ऐसे में उनका पोस्टर हटाना लोकतांत्रिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ है।
वहीं, AMU प्रशासन ने इस विवाद पर सफाई देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में केवल ऐतिहासिक और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े नेताओं के पोस्टर लगाने का निर्णय लिया गया था। प्रशासन के अनुसार, योगी आदित्यनाथ का पोस्टर गलती से लग गया था, इसलिए उसे हटा दिया गया।
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई है। कुछ लोग विश्वविद्यालय प्रशासन के फैसले का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कई लोग इसे विचारधारा आधारित भेदभाव बता रहे हैं।
AMU छात्रसंघ के कुछ सदस्यों ने कहा कि विश्वविद्यालय को राजनीतिक व्यक्तित्वों के पोस्टर लगाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे शैक्षणिक माहौल प्रभावित होता है। वहीं भाजपा के छात्र संगठन ने मांग की है कि प्रशासन सार्वजनिक रूप से माफी मांगे और योगी आदित्यनाथ का पोस्टर पुनः लगाया जाए।
यह विवाद अब राजनीतिक रंग ले चुका है और दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों के साथ मैदान में हैं। फिलहाल AMU प्रशासन शांति बनाए रखने की अपील कर रहा है, लेकिन मामला अभी भी चर्चा का विषय बना हुआ है।












