भारत की राष्ट्रपति और भारतीय सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर द्रौपदी मुर्मु ने आज इतिहास रच दिया। उन्होंने फ्रांस से खरीदे गए अत्याधुनिक लड़ाकू विमान राफेल में उड़ान भरकर भारतीय वायुसेना के गौरवशाली अध्याय में अपना नाम दर्ज कराया। यह उड़ान राजस्थान के जोधपुर एयरबेस से भरी गई, जहां राष्ट्रपति मुर्मु ने एयर चीफ मार्शल वी.आर. चौधरी और वरिष्ठ वायुसेना अधिकारियों की मौजूदगी में राफेल स्क्वाड्रन का निरीक्षण किया।
राष्ट्रपति मुर्मु ने विशेष प्रशिक्षण के बाद राफेल के रियर सीट पर बैठकर लगभग 30 मिनट तक आसमान में उड़ान भरी। उड़ान के दौरान उन्होंने विमान की शक्ति, गति और तकनीकी क्षमताओं का अनुभव किया। सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत राष्ट्रपति ने फ्लाइट सूट, हेलमेट और ऑक्सीजन मास्क धारण किया। उड़ान के बाद उन्होंने भारतीय वायुसेना के शौर्य की प्रशंसा करते हुए कहा, “यह मेरे लिए गर्व और प्रेरणा का क्षण है। हमारे वायु योद्धाओं की दक्षता और साहस पर देश को गर्व है।”
राफेल भारतीय वायुसेना का सबसे ताकतवर फाइटर जेट माना जाता है। यह मल्टीरोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट हवा से हवा और हवा से जमीन दोनों लक्ष्यों पर एक साथ प्रहार करने में सक्षम है। इस जेट में मेटेओर मिसाइल, स्कैल्प क्रूज मिसाइल और हैमर बम जैसी अत्याधुनिक हथियार प्रणाली लगी है।
गौरतलब है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में इसी राफेल जेट ने पाक अधिकृत क्षेत्र में आतंकी ठिकानों पर जबरदस्त हमला किया था। उस ऑपरेशन में राफेल ने दुश्मन के रडार से बचते हुए सटीक निशाना साधा और आतंकी बंकरों को ध्वस्त कर दिया था। उस मिशन के बाद राफेल की मारक क्षमता की चर्चा दुनियाभर में हुई थी।
राष्ट्रपति मुर्मु की यह उड़ान न केवल महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बनी है, बल्कि इसने यह संदेश भी दिया है कि भारत की सुरक्षा व्यवस्था अब और भी मजबूत और आत्मनिर्भर हो चुकी है। इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि “यह भारत के आत्मविश्वास, तकनीकी दक्षता और सशस्त्र बलों की नयी ऊंचाइयों का प्रतीक है।”
राष्ट्रपति की राफेल उड़ान भारतीय वायुसेना के लिए एक ऐतिहासिक दिन साबित हुई, जिसने देशवासियों में गर्व और उत्साह की लहर दौड़ा दी।












