कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे की असम के युवाओं को लेकर की गई टिप्पणी पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। उनकी कथित टिप्पणी को लेकर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें मूर्ख करार दिया और कहा कि इस मामले में कानूनी कार्रवाई की जाएगी। भाजपा ने इसे कांग्रेस द्वारा पूर्वोत्तर राज्यों के अपमान की एक और मिसाल बताया है, जिससे असम का सियासी तापमान अचानक बढ़ गया है।
दरअसल, प्रियांक खरगे ने हाल ही में एक बयान में कहा था कि असम और पूर्वोत्तर के लोग बेहतर रोजगार के लिए दक्षिण भारत का रुख करते हैं, क्योंकि वहां अवसरों की कमी है। इस बयान को लेकर असम में नाराजगी फैल गई। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि कांग्रेस नेता प्रियांक खरगे ने असम के युवाओं का अपमान किया है। उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि असम के लोग मेहनती, शिक्षित और स्वाभिमानी हैं। इस तरह के बयान से कांग्रेस की पूर्वोत्तर विरोधी मानसिकता झलकती है।
भाजपा ने पूरे देश में कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी के प्रवक्ताओं ने कहा कि कांग्रेस हमेशा से पूर्वोत्तर को हाशिए पर रखती आई है। राहुल गांधी से लेकर उनके नेताओं तक, सभी को असम और अन्य राज्यों के योगदान की समझ नहीं है। वहीं, कांग्रेस ने बचाव में कहा कि प्रियांक खरगे के बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है, उनका आशय रोजगार नीति और क्षेत्रीय असमानता की ओर ध्यान दिलाने का था।
असम कांग्रेस ने भी बयान जारी कर कहा कि भाजपा इस मुद्दे को चुनावी हथियार बना रही है और लोगों की भावनाओं से खेल रही है। हालांकि, राज्य में भाजपा कार्यकर्ता कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं और खरगे से सार्वजनिक माफी की मांग की है।
इस विवाद ने न केवल कर्नाटक और असम की राजनीति को गर्मा दिया है, बल्कि यह बहस भी छेड़ दी है कि देश में क्षेत्रीय असमानता और राजनीतिक बयानबाजी के बीच संतुलन कैसे कायम रखा जाए।












