नोबेल शांति पुरस्कार विजेता और ग्रामीण बैंक के संस्थापक प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस ने बांग्लादेश में होने वाले आगामी आम चुनावों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि देश में कुछ राजनीतिक ताकतें लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने और चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश कर रही हैं, जिससे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना कठिन हो सकता है। यूनुस का यह बयान ऐसे समय आया है जब बांग्लादेश की राजनीति लगातार तनावपूर्ण माहौल से गुजर रही है और विपक्षी दल सरकार पर प्रशासनिक दुरुपयोग के आरोप लगा रहे हैं।
मोहम्मद यूनुस ने कहा कि एक लोकतांत्रिक राष्ट्र के लिए सबसे बड़ी ताकत जनता का विश्वास होता है, और अगर चुनाव प्रक्रिया पर भरोसा डगमगाता है तो देश की लोकतांत्रिक नींव कमजोर हो जाती है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की कि वह बांग्लादेश में स्वतंत्र और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने में रचनात्मक भूमिका निभाए। यूनुस ने कहा, हमारा देश एक संवेदनशील दौर से गुजर रहा है। यह जरूरी है कि सभी राजनीतिक दल संविधान और लोकतंत्र की मर्यादाओं का सम्मान करें।
बांग्लादेश में आम चुनाव अगले वर्ष की शुरुआत में होने की संभावना है। वर्तमान प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग सरकार लगातार चौथे कार्यकाल के लिए सत्ता में बने रहने की कोशिश कर रही है, जबकि मुख्य विपक्षी दल बीएनपी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी सरकार पर चुनाव आयोग और प्रशासनिक संस्थानों पर नियंत्रण रखने का आरोप लगा रही है। विपक्ष का कहना है कि निष्पक्ष चुनाव तभी संभव है जब एक अंतरिम सरकार की देखरेख में मतदान कराया जाए।
मोहम्मद यूनुस ने यह भी कहा कि बांग्लादेश के युवाओं में लोकतंत्र के प्रति नई उम्मीदें हैं, और यह जिम्मेदारी नेताओं की है कि वे इन उम्मीदों को टूटने न दें। उन्होंने राजनीतिक हिंसा, धमकियों और डर के माहौल को खत्म करने की अपील करते हुए कहा कि शांति, संवाद और पारदर्शिता ही लोकतंत्र की सच्ची पहचान है।
गौरतलब है कि मोहम्मद यूनुस को 2006 में गरीबी उन्मूलन और सूक्ष्म वित्त मॉडल के लिए नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वे लंबे समय से सामाजिक न्याय, पारदर्शिता और मानवाधिकारों के पक्षधर रहे हैं। उनके हालिया बयान ने बांग्लादेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है, जहां स्वतंत्र चुनाव को लेकर सवाल लगातार उठते रहे हैं।












