सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत को देश का अगला मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। हरियाणा के हिसार जिले के छोटे से गांव पेटवार में जन्मे सूर्यकांत की इस उपलब्धि से पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है। ग्रामीणों ने उनकी सफलता को गांव और प्रदेश के लिए गौरव का क्षण बताया।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पहचान एक मेहनती, संवेदनशील और सरल स्वभाव वाले व्यक्ति के रूप में होती है। उनका जीवन संघर्ष और समर्पण की मिसाल माना जाता है। गांव के लोग उन्हें प्यार से मास्टरजी का बेटा कहकर याद करते हैं, क्योंकि उनके पिता गांव के विद्यालय में शिक्षक थे। बचपन से ही मेधावी सूर्यकांत ने पढ़ाई में गहरी रुचि दिखाई और आगे चलकर न्याय के क्षेत्र में देश का नाम रोशन किया।
उनके बड़े भाई ने मीडिया से बातचीत में बताया कि सूर्यकांत न केवल एक उत्कृष्ट छात्र थे, बल्कि एक संवेदनशील कवि भी थे। उन्होंने कॉलेज के दिनों में कई कविताएँ लिखीं, जिनमें उनकी प्रसिद्ध कविता “मेंढ पर मिट्टी चढ़ा दो” आज भी चर्चित है। उनके भाई ने कहा कि उनमें एक किसान की आत्मा और एक कवि का दिल बसता है, जो न्याय और करुणा दोनों को समान रूप से महसूस करता है।
उनकी भाभी राजबाला ने भावुक होकर बताया कि बचपन में उन्होंने ही सूर्यकांत की परवरिश की थी। वो बहुत संस्कारी और सहृदय थे। आज उन्हें देश का मुख्य न्यायाधीश बनते देखकर गर्व और भावनाओं से मन भर आया है, उन्होंने कहा।
गांव पेटवार में न्यायमूर्ति सूर्यकांत की नियुक्ति की खबर फैलते ही मिठाइयां बांटी गईं और लोगों ने ढोल-नगाड़ों से खुशी जाहिर की। बुजुर्गों ने कहा कि यह गांव के लिए ऐतिहासिक क्षण है, जिसने अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत की नियुक्ति को न्यायपालिका के लिए एक महत्वपूर्ण अध्याय माना जा रहा है। उनके न्यायिक दृष्टिकोण को हमेशा मानवता, समानता और पारदर्शिता से जोड़ा गया है। ग्रामीण पृष्ठभूमि से उठकर देश के सर्वोच्च न्यायिक पद तक पहुंचने की उनकी यात्रा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है।
इस प्रकार, मास्टरजी के बेटे से लेकर देश के मुख्य न्यायाधीश तक का उनका सफर भारत की लोकतांत्रिक और न्यायप्रिय व्यवस्था का प्रतीक बन गया है।












